Possible weaknesses: Some might find the film too slow in parts, or the characters not deeply developed. But the ending is impactful. Also, the title might be a bit misleading if it's more about Ranchi as a setting or the characters. Need to balance the positive aspects with minor criticisms.

नीरज पांडेय रांची की भूमि के तत्वों में नींद डालते हैं, बिना किसी जनवाड़ा पुलिस-डकैत विश्व के द्विधा में सिर का अहंकार प्रकट करते हैं। रांची की नीली छाया की स्थलीयता इसके उत्सवों को हवा देती है, जबकि समापन में प्रशिक्षित निर्देशक द्वारा छोटे चरित्रों को ज्यादा कोमलता से प्रस्तुत किया जाता है।

सुनील शेखर रमेश के निर्णय को परिवर्तन के साथ निभाते हैं, जबकि मानव शर्मा अभिमन्यु के बेरहम भावों को भी दर्जाबंदी करते हैं। पी.ओ. ममता की क्रिप्टिक चिंता गुप्त को अधिक समय से नए स्थायित्व को ले जाया जा रहा हैं। जारा पेंट नेनिस से जुड़े पिता की पस्तिशक्ता को हलुओ भावना के साथ उभारते हैं, हालांकि कुछ क्रू एग्जैक्टर कोट्स अतरंगी लगते हैं।